मंकी पॉक्स से कैसे बचें।

कोविड 19 अर्थात  कोरोना से देश दुनिया अभी उबर भी नहीं पायी थी की एक और  संक्रामक बीमारी मंकीपॉक्स ने दस्तक देकर सबकी परेशानियों को बढ़ा दिया है। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस इस बीमारी के संभावित संक्रमणों की जांच कर रहे हैं वही अब भारत में भी इस बीमारी ने दस्तक दे दिया है जहाँ देश में को 4 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है

दिल्‍ली में जिस व्यक्ति में  मंकीपॉक्‍स का पहला मामला सामने आया है वह कभी विदेश नहीं गया । हालाँकि वह बीते दिनों हिमाचल प्रदेश में एक पार्टी में शामिल जरूर हुआ था। वहां से वापस आने पर मरीज में बुखार और त्‍वचा पर घाव जैसे लक्षण दिखे गए तो उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया ।

आईये जानते है की मंकिपॉक्स बीमारी क्या है यहाँ कैसे फैलती है और इससे बचाव के क्या उपाय है

चिकित्सा वैज्ञानिकों के अनुसार मंकीपॉक्स मानव चेचक के समान एक दुर्लभ वायरल संक्रमण है। जिसका पहला मानव मामला 1970 में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में दर्ज किया गया था।  यह रोग मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावन क्षेत्रों में होता है और कभी-कभी अन्य क्षेत्रों में पहुंच जाता है।

हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में संक्रमक रोगों पर सलाहकार डॉ. मोनालिसा साहू के अनुसार, ‘मंकीपॉक्स एक दुर्लभ जूनोटिक बीमारी है जो मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण के कारण होती है। मंकीपॉक्स वायरस पॉक्सविरिडे परिवार से संबंधित है, जिसमें चेचक और चेचक की बीमारी पैदा करने वाले वायरस भी शामिल हैं।’

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, मंकीपॉक्स आमतौर पर बुखार, दाने और गांठ के जरिये उभरता है, इससे कई प्रकार की चिकित्सा जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। रोग के लक्षण आमतौर पर दो से चार सप्ताह तक दिखते हैं, जो अपने आप दूर होते चले जाते हैं।

इसमामले में हाल के समय में, मृत्यु दर का अनुपात लगभग 3-6 प्रतिशत रहा है, लेकिन यह 10 प्रतिशत तक भी जा सकता है।

मंकीपॉक्स किसी संक्रमित व्यक्ति या जानवर के निकट संपर्क के माध्यम से या वायरस से दूषित सामग्री के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है।  माना जाता है कि यह चूहों,  और गिलहरियों जैसे जानवरों से भी फैलता है।

यह रोग घावों, शरीर के तरल पदार्थ, श्वसन बूंदों और दूषित सामग्री जैसे यूज किये हुए कपडे और बिस्तर के माध्यम से भी फैलता है। हालाँकि यह वायरस चेचक की तुलना में कम संक्रामक है और कम गंभीर बीमारी का कारण बनता है।

बेशक यह पुरानी बीमारी है लेकिन कुछ दिनों पहले इसका पहला मामला मिलने के बाद यह बहुत ही कम समय में बीस के करीब देशों में फैल गया है जो की चिंता का विषय है ।  

मंकीपॉक्स के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों के दर्द, पीठ दर्द, सूजी हुई लसीका ग्रंथियां, ठंड लगना और थकावट आदि शामिल हैं। बुखार आने के 1 से 3 दिनों के भीतर रोगी को एक दाना हो जाते हैं, जो अक्सर चेहरे पर शुरू होता है और फिर शरीर के अन्य भागों में फैल जाते हैं।

इससे बचाव के लिए उन जानवरों के संपर्क से बचें, जो वायरस को शरण दे सकते हैं। इसका मतलब है कि आपको उन जानवरों और लोगों के संपर्क में आने से बचना है, जो बीमार हैं या जो उन क्षेत्रों में मृत पाए गए हैं जहां मंकीपॉक्स होता है।

इसलिए आपको किसी बीमार के संपर्क में आने वाली किसी भी सामग्री, जैसे बिस्तर, आदि के संपर्क में आने से बचना चाहिए।

अगर किसी को ये बीमारी हो जय तो संक्रमित रोगियों को अन्य लोगों से अलग रखें क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा हो सकता है। ध्यान रहे कि यह वायरस संक्रमित इंसान और जानवर से तुरंत फैलता है  

मरीजों की देखभाल करते समय व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट का प्रयोग करें। ध्यान रहे कि यह वायरस बीस के करीब देशों में फैल गया है इसलिए इसे गंभीरता से लें और कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। और सावधानी बरते क्योंकि सावधानी ही सौ  एक दवाई माना जाता है।

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